Novels मानस का हंस / Manas Ka Hans Hindi Book PDF Download

मानस का हंस / Manas Ka Hans Hindi Book PDF Download

मानस का हंस / Manas Ka Hans Hindi Book PDF Download
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Description of मानस का हंस / Manas Ka Hans Hindi Book PDF Download

Name  मानस का हंस / Manas Ka Hans Hindi Book PDF Download
Author  Invalid post terms ID.
Size  19.4 MB
Pages  382
Category  Novels
Language  Hindi
Download Link  Working


“मानस का हंस”त लेखक अमृतलाल नागर का प्रतिष्ठित बृहद् उपन्यास है। इसमें पहली बार व्यापक कैनवास पर “रामचरितमानस” के लोकप्रिय लेखक गोस्वामी तुलसीदास के जीवन को आधार बनाकर कथा रची गई है, जो विलक्षण के रूप से प्रेरक, ग्यानवर्धक और पठनीय है। इस उपन्यास में तुलसीदास का जो स्वरूप चित्रित किया गया है, वह एक सहज मानव का रूप है। यही कारण है कि “मानस का हंस” हिन्दी उपन्यासों में ‘क्लासिक’ का सम्मान पा चुका है और हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधी माना जाता है। नागरजी ने इसे गहरे अध्ययन और मंथन के पशचात् अपने विशिष्ट लखनवी अन्दाज़ में लिखा है। बृहद होन् पर भी यह उपन्यास अपनी रोचकता में अप्रतिम है।

 

Summary of book मानस का हंस / Manas Ka Hans Hindi Book PDF Download

श्रावण कृष्णपक्ष की रात। मूसलाधार वर्षा, बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की कड़कन से धरती लरज़-लरज़ उठती है। एक खण्डहर देवालय के भीतर बौछारों से बचाव करते सिमटकर बैठे हुए तीन व्यक्ति बिजली के उजाले में पलभर के लिए तनिक से उजागर होकर फिर अँधेरे में विलीन हो जाते हैं। स्वर ही उनके अस्तित्व के परिचायक हैं।
“बादल ऐसे गरज रहे हैं मानो सर्वग्रासिनी काम क्षुधा किसी संत के अंतर आलोक को निगलकर दम्भ-भरी डकारें ले रही हो। बौछारें पछतावे के तारों-सी सनसना रही हैं।…बीच-बीच में बिजली भी वैसे ही चमक उठती है जैसे कामी के मन में क्षण-भर के लिए भक्ति चमक उठती है।”
“इस पतित की प्रार्थना स्वीकारें गुरु जी, अब अधिक कुछ न कहें। मेरे प्राण भीतर-बाहर कहीं भी ठहरने का ठौर नहीं पा रहे हैं। आपके सत्य वचनों से मेरी विवशता पछाड़ें खा रही है।”
“हां ऽ, एक रूप में विवशता इस समय हमें भी सता रही है। जो ऐसे ही बरसता रहा तो हम सबेरे राजापुर कैसे पहुंच सकेंगे रामू?”
“राम जी कृपालु हैं प्रभु। राजापुर अब अधिक दूर भी नहीं है। हो सकता है, चलने के समय तक पानी रुक जाय।”
तीसरे स्वर की बात सच्ची सिद्ध हुई। घड़ी-भर में ही बरखा थम गई। अँधेरे में तीन आकृतियाँ मन्दिर से बाहर निकलकर चल पड़ीं।

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Q. Who is the author of the book मानस का हंस / Manas Ka Hans Hindi Book PDF Download?
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